।।एक नवाचार सा।।

 ।।एक नवाचार सा।।

है पुष्पित 
एक नवाचार सा,
एक अंकुर
मेरे मन में,
उषा की एक
किरण की भांति,
एक लकीर
मेरे मन में,
नदी पर से
जैसे बहती है,
पवन,
लहर ऊठाती
मेरे मन में
तड़ित पात सी,
झंकार उठ रही
मेरे मन में!

~~~~~~ देवव्रत पांण्डेय🖊️🖊️📃

@pandey_deobrat

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